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अन्य कहानियांओलंपिक: भारतीय मुक्केबाजी और वेट कैटेगरी को कैसें समझें

ओलंपिक: भारतीय मुक्केबाजी और वेट कैटेगरी को कैसें समझें

ओलंपिक में मुक्केबाजी का दौर हमेशा से शानदार रहा हांलाकि भारतीय मुक्केबाजों ने ओलंपिक से भारत के लिए केवल तीन हीं मैडल जीते है लेकिन भारतीय राष्ट्रीय खेलों और भारत में मुक्केबाजी को लेकर बढ़ रही युवा प्रतिभा से इसकी संख्याम में बढ़ोतरी की उम्मीद है।

ओलंपिक में मुक्केबाजी का इतिहास

  • ओलंपिक में एक खेल के रुप में मुक्केबाजी को पहली बार 1904 में पेश किया गया।
  • 1912 मे इसे ओलंपिक का हिस्सा नहीं था, लेकिन तब से एक नियमित सदस्य रहा है।
  • 2012 तक केवल पुरुषों की बॉक्सिंग ही ओलंपिक का हिस्सा थी।
  • ओलंपिक में महिला बॉक्सिंग की शुरुआत सबसे पहले लंदन 2012 खेलों में हुई थी।

ओलंपिक में भारत के कितने मैडल

ओलंपिक में मैडल जीतने के कतार मे भारत अभी काफी पिछे हैं और इस कतार में संयुक्त राज्य अमेरिका सबसे सफल देश है जिसने ओलंपिक में मुक्केबाजी के लिए 110 पदक जीते हैं।

  • भारत ने ओलिंपिक में बॉक्सिंग में अब तक केवल तीन मेडल ही जीते हैं.
  • पहला पदक 2008 बीजिंग ओलंपिक में आया था जिसे विजेंदर सिंह ने जीता था।
  • भारत में मुक्केबाजी के अन्य पदक विजेता मैरी कॉम और लवलीना बोरगोहेन हैं।

पेरिस ओलंपिक में वेट कैटेगरी पुरुषों के लिए

2024 में पेरिस ओलंपिक में शामिल होने वाले पुरुषों के भार वर्ग को सात वर्गों में बांटा गया है. पिछली बार यह आठ श्रेणियों मे था जो टोक्यो 2020 में खेली गई थी।

  • 51किग्रा
  • 57 किग्रा
  • 63.5 किग्रा
  • 71 किग्रा
  • 80 किग्रा
  • 92 किग्रा
  • +92किग्रा

भारत के लिए ओलंपिक मुक्केबाजी में पदक जीतने वाले एकमात्र भारतीय व्यक्ति विजेंदर सिंह हैं, विजेंदर सिंह ने 2008 में बीजिंग ओलंपिक में पुरुषों के मिडिलवेट (75 किग्रा) वर्ग में कांस्य पदक जीता था।

यह भी पढ़ें- बॉक्सिंग को ओलंपिक में शामिल नहीं करने से भारतीय युवाओं का नुकसान

पेरिस ओलंपिक में वेट कैटेगरी पुरुषों के लिए

पेरिस 2024 के लिए महिलाओं की भार श्रेणियों को छह वर्गों में अलग किया गया है यह टोक्यो 2020 में शामिल की गई पांच भार श्रेणियों से एक अधिक है, सबसे कम भार वर्ग 50 किग्रा है जबकि उच्चतम 75 किग्रा है. पेरिस ओलंपिक में महिला मुक्केबाजी के लिए विभिन्न भार वर्ग हैं:

  • 50 किलो
  • 54 किग्रा
  • 57 किग्रा
  • 60 किग्रा
  • 66 किग्रा
  • 75 किग्रा

ओलंपिक में महिलाओं के लिए मुक्केबाजी का इतिहास ज्यादा पुरानी नहीं. पहली बार इसे 2012 में शुरू की गई और भारत की विश्व चैंपियन मैरी कॉम को ओलंपिक इतिहास की किताबों में अपना नाम लिखने में देर नहीं लगी,

क्योंकि उन्होंने 2012 में लंदन ओलंपिक में कांस्य पदक जीता था. मैरी कॉम ने 51 किग्रा (फ्लाईवेट) वर्ग में कांस्य पदक जीता, वह ओलंपिक में मुक्केबाजी में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।

पिछले टोक्यो 2020 में, भारत ने ओलंपिक मुक्केबाजी में एक पदक जीता. लवलीना बोर्गोहेन ओलंपिक में मुक्केबाजी में पदक जीतने वाली दूसरी भारतीय महिला बनीं। उन्होंने वेल्टरवेट (69 किग्रा) वर्ग में कांस्य पदक जीता।

यह भी पढ़ें- बॉक्सिंग को ओलंपिक में शामिल नहीं करने से भारतीय युवाओं का नुकसान

Dheeraj Roy
Dheeraj Royhttps://boxingpulse.net/
मैं शहर का नया बॉक्सिंग पत्रकार हूं। सभी चीजों-मुक्केबाजी पर अंतर्दृष्टिपूर्ण, रोशनी वाली रिपोर्टिंग की अपेक्षा करें।
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